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क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रविकांत भट्ट का पैतृक गाँव में भव्य स्वागत


बस्ती (सदर)। प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती, और जब संकल्प दृढ़ हो तो अभाव भी राह नहीं रोक सकते। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है बस्ती जिले के मधुकरपुर गाँव निवासी रविकांत भट्ट ने। भारतीय टी-20 एशिया कप डेफ (बधिर) क्रिकेट टीम के मुख्य कोच नियुक्त होने के बाद पहली बार अपने पैतृक गाँव पहुँचने पर रविकांत का ऐतिहासिक स्वागत किया गया।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकला विजय जुलूस
शनिवार को जैसे ही रविकांत भट्ट अपने गाँव मधुकरपुर पहुँचे, क्षेत्रवासियों ने उन्हें पलकों पर बिठा लिया। ग्राम प्रधान सुखसागर उपाध्याय के नेतृत्व में युवाओं ने जोश और उत्साह के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर जुलूस निकाला। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से लादकर अपने 'नायक' का अभिनंदन किया। उत्साह का आलम यह था कि युवाओं ने कोच रविकांत को कंधों पर उठा लिया।
सीमित संसाधनों से शिखर तक का सफर
ओम प्रकाश भट्ट के पुत्र रविकांत की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने ग्रामीण परिवेश और बेहद सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट की बारीकियों को समझा। खेल के प्रति उनके इसी समर्पण ने उन्हें राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुँचाया है।
"मैदान चरित्र निर्माण की पाठशाला है"
सम्मान समारोह के दौरान भावुक होते हुए रविकांत भट्ट ने कहा:
"मैदान केवल हार-जीत तय करने की जगह नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण की पाठशाला है। मेरी यह सफलता बस्ती के उन तमाम उभरते खिलाड़ियों को समर्पित है, जो अभावों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।"
क्षेत्र में खुशी की लहर
ग्राम प्रधान ने उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। इस गौरवमयी अवसर पर राम बाहाल शर्मा, आशुतोष भट्ट, धीरज भट्ट सहित भारी संख्या में ग्रामीण और खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

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